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- Dec 12, 2024
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नमस्कार दोस्तो, मई उप का रहने वाला और जॉब की वजह से गुजरात आ गया. ये स्टोरी मेरे पुराने भाड़े के मकान की है.
चलिए अब स्टोरी पे आते है.
ये स्टोरी 10 साल पहले की है जब मेरी कंपनी से मुझे जॉब इंटरव्यू के लिए आमेडबॅड बुलाया था और अगर इंटरव्यू सक्सेस्फुल हो जाता तो उसी वीक मे जाय्निंग के लिए भी बोल दिया था. अब एक वीक के लिए होटेल मे रहना तो पासिबल था नही. इसीलिए मैने एक वीक के लिए ऑनलाइन रेंट पे मकान ढूँढना शुरू किया. तब मुझे एक ऑनलाइन साइट पे करेंट ओनर मिला. मेरी उससे बात हुई और वो एक महीने के लिए सस्ते मे रूम देने के लिए माँग था.
आख़िर वो पल आ ही गया जब मई उनके घर पौहचा, छोटी पटेल फॅमिली थी. मेरे बेल बजाने पर एक लेडी ने दरवाजा खोला. वो दिखने मे कुछ खास नही थी पर फिगर कमाल का था. मुझे बाद मे पता चला की वो मेरी मकान मालकिन है. मैने उन्हे अपना परिचय दिया तो वो झट से समझ गई और गुजराती मे अपने हज़्बेंड को बुलाया (जो उस टाइम पे मुझे बिल्कुल समझ नही आती थी).
उनका घर काफ़ी बड़ा था और मकान मलिक का खुद का बिज़्नेस थी. रेखा (मलिक का वाइफ) का फिगर एकद्ूम डॉल शेप्ड था. और उसकी सास (सुनीता) यानी की आकाश की मा (मकान मलिक का नाम आकाश था) वो क्या कमाल की माल थी. 55 की उमर मे भी सिर्फ़ 45 की लगती थी. शायद मुझे बड़ी औरते ज़्यादा पसंद है, इसीलिए. तो आकाश ने मुझे अपना घर दिखाया और मेरा कमरा 1स्ट्रीट फ्लोर पर था, जिसकी सीढ़िया अंदर और बाहर दोनो साइड से थी.
कमरे मे कुछ ज़्यादा समान नही था. बस एक बेड और पंखा. मैने अपना समान रखा और आकाश ने मुझे अलविदा कहा. मैने बौहत सारी मकान मालकिन सेक्स वाली स्टोरी पढ़ी थी पर मुझे नही लगा मेरे साथ भी कुछ एसा होगा की मेरी लाइफ के मज़े ही हो जाएँगे. उस टाइम पे ये सब ना सोचते हुए मई अपने अगले दिन के इंटरव्यू के लिए प्रिपेर करने लगा. उस रात पटेल फॅमिली के साथ ही खाया और सो गया.
अगले दिन सुबह जब रेडी हुआ और नीचे आया तो सुनीता ने मुझे प्रसाद दिया और बेस्ट ऑफ लक बोला. मेरा तो जैसे दिन बन गया हो इतनी सेक्सी स्माइल देख कर. इंटरव्यू देने गया और पूरे दिन मे 3 रौंद हुए. रिज़ल्ट तो बताया नई पर बोला की कल तक कॉल आ जाएगा रिगार्डिंग रिज़ल्ट.
अब मई टेन्षन से भरा हुआ वापिस रिक्कशे मे बेता और घर पौच्ा. वाहा घर पर रेखा अकेली थी. मई उपर जाने लगा तो रेखा ने मुझे बुलाया और बेत्ने को बोला. उसने शायद मेरे चेहरे पे टेन्षन देख ली थी और वो मुझे समझने लगी की ये तो सब होता रहता है.
वो भी जॉब करती थी पर घर संभालने के चक्कर मे उसे जॉब छोड़नी पड़ी थी. हमने थोड़ी यहा वाहा की बाते की तो मेरा मूड एकद्ूम मस्त हो गया. रेखा दिखने मे भले अप्सरा ना हो पर बातो से किसी का भी दिल बस मे कर सकती थी.
मुझे मज़ा आने लगी रेखा की कंपनी मे. तब तक सुनीता आ गयी और वो बेत गयी. रेखा खाना बनाने मे बिज़ी हो गयी और मई मस्त मूड मे सुनीता के साथ फ्लर्टिंग करने मे. वो 55 की थी पर एकद्ूम मस्त सेक्सी फिगर मेनटेन कर रखा था. मैने वही बेते बेते उसकी फिगर की तारीफ कर दी और उस टाइम उसने कुछ नही बोला. मुझे लगा शायद बुरा मान गई तो मैने टॉपिक रेखा की तरफ मोड़ दिया की, “भाभी खाना बन जाए तो बुला लीजिएगा” और मई हाथ मु ढोने रूम मे चला गया.
वही रूम मे पड़े पड़े मेरे दिमाग़ मे सुनीता के सेक्सी ख़याल आने लगे और मेरा लंड एकद्ूम से तंबू बना के खड़ा हो गया. क्यूकी मुझे आदत नही थी रूम बंद करके रहने की, इसलिए मेरे रूम का दरवाज़ा खुला ही था और मई सुनीता को याद करते हुए सिर्फ़ चड्धि मे था. मेरा हाथ अपने लंड को सहला रहा था चढ़ि के उपारसे और तभी मुझे एक परछाई दिखी. सुनीता दरवाज़े पे खड़ी थी. वो मुझे खाने के लिए बुलाने आई थी पर उसने कुछ नही बोला और सिर्फ़ खड़ी रही. पता नही मुझे क्या सूझा. मई भी बस उसे इग्नोर करते हुए सहलाता रहा. कुछ सेकेंड्स के बाद उसने दरवाज़ा नॉक किया और मैने नाटक किया की, “आप कब आए?”
सुनीता शायद वही पाट गई थी. पर उसने तोड़ा गुस्से से मु मोड़ा और मुझे बोला, “खाने आ जाओ.” और बिना कुछ कहे चली गयी. मैने सच्ची मे खुद को कोसा और सोचा की, ‘काश मई एसा ना करता.’ कुछ झिझक के साथ नीचे गया खाने तो सुनीता सामने बेती थी और आकाश अभी तक नई आया था.
मैने कमरे की ऑक्वर्डनेस हटाने के लिए रेखा से आकाश के बारे मे पूछा और मुझे पता चला की आकाश 5 दिन के लिए सूरत गया हुआ था. ये जान के मुझे थोड़ी शांति हुई. फिर टीवी पर कोई मोविए चल रही थी और हमने थोड़ी यहा वाहा की बाते की. सुनीता मुझे इग्नोर कर रही थी पर रेखा मुझसे काफ़ी फ्रेंड्ली लग रही थी. उसने मुझसे नेक्स्ट दे कुछ सब्जिया लाने के लिए बोला और मुझे आकाश के बिके की चाभी भी दी.
मई निकालने ही वाला था की रेखा ने बोला वो भी चलेगी और यहा से शुरू हुई मेरी और रेखा की कहानी. मुझे बिके चलानी उतनी आचे से नही आती थी. रेखा ने एक सलवार कमीज़ डाली थी और वो मेरी गर्लफ्रेंड की तरह मुझे कमर से पकड़ के बेत गई. मुझे तो जैसे मज़ा ही आ गया. मई पूरा रास्ता उसके बूब्स को अपनी बॅक पे टच करवाता गया और वो भी कुछ खास रेज़िस्ट नही कर रही थी.
सब्जिया लेने के बाद रेखा ने मुझे एक फुल्के की लारी पे रुकने के लिए बोला. मई आज तक पानी पूरी बोलना भूल जाता हू. मुझे फुल्के कुछ इतने खास पसंद नई थे पर उसने मुझे एक फूलका ज़बरदस्ती अपने हाथ से खिलाया और तब तोड़ा सा पानी उसके कमीज़ पर गिर गया. उसे सॉफ करने के चक्कर मे मेरी कोहनी उसके बूब्स पे टच हो गई और उसने मज़े से आउच किया.
हम पूरे रास्ते गर्लफ्रेंड ओर बाय्फ्रेंड की तरह चिपक के रिटर्न जाते रहे. वो रास्ता बताने के बहाने मुझसे चिपकी रही और मई उसपे लाइन मरता रहा. घर आने से पहले उसने मेरे कान मे बोला गुजराती मे, “आज राते कैक स्पेशल करिसू (आज रात कुछ स्पेशल करेंगे).” मुझे उस टाइम पे तो कुछ समझ नई आया और मेरे पूछने का टाइम भी नई था क्यूकी हम घर पौहछ गये.
उस रात क्या हुआ और क्या था स्पेशल सर्प्राइज़, वो जानने के लिए अपना फीडबॅक ज़रूर दे देवेंड्रफोररोबोट्स@गमाल.कॉम पर. और अगले पार्ट का इंतज़ार करे.
चलिए अब स्टोरी पे आते है.
ये स्टोरी 10 साल पहले की है जब मेरी कंपनी से मुझे जॉब इंटरव्यू के लिए आमेडबॅड बुलाया था और अगर इंटरव्यू सक्सेस्फुल हो जाता तो उसी वीक मे जाय्निंग के लिए भी बोल दिया था. अब एक वीक के लिए होटेल मे रहना तो पासिबल था नही. इसीलिए मैने एक वीक के लिए ऑनलाइन रेंट पे मकान ढूँढना शुरू किया. तब मुझे एक ऑनलाइन साइट पे करेंट ओनर मिला. मेरी उससे बात हुई और वो एक महीने के लिए सस्ते मे रूम देने के लिए माँग था.
आख़िर वो पल आ ही गया जब मई उनके घर पौहचा, छोटी पटेल फॅमिली थी. मेरे बेल बजाने पर एक लेडी ने दरवाजा खोला. वो दिखने मे कुछ खास नही थी पर फिगर कमाल का था. मुझे बाद मे पता चला की वो मेरी मकान मालकिन है. मैने उन्हे अपना परिचय दिया तो वो झट से समझ गई और गुजराती मे अपने हज़्बेंड को बुलाया (जो उस टाइम पे मुझे बिल्कुल समझ नही आती थी).
उनका घर काफ़ी बड़ा था और मकान मलिक का खुद का बिज़्नेस थी. रेखा (मलिक का वाइफ) का फिगर एकद्ूम डॉल शेप्ड था. और उसकी सास (सुनीता) यानी की आकाश की मा (मकान मलिक का नाम आकाश था) वो क्या कमाल की माल थी. 55 की उमर मे भी सिर्फ़ 45 की लगती थी. शायद मुझे बड़ी औरते ज़्यादा पसंद है, इसीलिए. तो आकाश ने मुझे अपना घर दिखाया और मेरा कमरा 1स्ट्रीट फ्लोर पर था, जिसकी सीढ़िया अंदर और बाहर दोनो साइड से थी.
कमरे मे कुछ ज़्यादा समान नही था. बस एक बेड और पंखा. मैने अपना समान रखा और आकाश ने मुझे अलविदा कहा. मैने बौहत सारी मकान मालकिन सेक्स वाली स्टोरी पढ़ी थी पर मुझे नही लगा मेरे साथ भी कुछ एसा होगा की मेरी लाइफ के मज़े ही हो जाएँगे. उस टाइम पे ये सब ना सोचते हुए मई अपने अगले दिन के इंटरव्यू के लिए प्रिपेर करने लगा. उस रात पटेल फॅमिली के साथ ही खाया और सो गया.
अगले दिन सुबह जब रेडी हुआ और नीचे आया तो सुनीता ने मुझे प्रसाद दिया और बेस्ट ऑफ लक बोला. मेरा तो जैसे दिन बन गया हो इतनी सेक्सी स्माइल देख कर. इंटरव्यू देने गया और पूरे दिन मे 3 रौंद हुए. रिज़ल्ट तो बताया नई पर बोला की कल तक कॉल आ जाएगा रिगार्डिंग रिज़ल्ट.
अब मई टेन्षन से भरा हुआ वापिस रिक्कशे मे बेता और घर पौच्ा. वाहा घर पर रेखा अकेली थी. मई उपर जाने लगा तो रेखा ने मुझे बुलाया और बेत्ने को बोला. उसने शायद मेरे चेहरे पे टेन्षन देख ली थी और वो मुझे समझने लगी की ये तो सब होता रहता है.
वो भी जॉब करती थी पर घर संभालने के चक्कर मे उसे जॉब छोड़नी पड़ी थी. हमने थोड़ी यहा वाहा की बाते की तो मेरा मूड एकद्ूम मस्त हो गया. रेखा दिखने मे भले अप्सरा ना हो पर बातो से किसी का भी दिल बस मे कर सकती थी.
मुझे मज़ा आने लगी रेखा की कंपनी मे. तब तक सुनीता आ गयी और वो बेत गयी. रेखा खाना बनाने मे बिज़ी हो गयी और मई मस्त मूड मे सुनीता के साथ फ्लर्टिंग करने मे. वो 55 की थी पर एकद्ूम मस्त सेक्सी फिगर मेनटेन कर रखा था. मैने वही बेते बेते उसकी फिगर की तारीफ कर दी और उस टाइम उसने कुछ नही बोला. मुझे लगा शायद बुरा मान गई तो मैने टॉपिक रेखा की तरफ मोड़ दिया की, “भाभी खाना बन जाए तो बुला लीजिएगा” और मई हाथ मु ढोने रूम मे चला गया.
वही रूम मे पड़े पड़े मेरे दिमाग़ मे सुनीता के सेक्सी ख़याल आने लगे और मेरा लंड एकद्ूम से तंबू बना के खड़ा हो गया. क्यूकी मुझे आदत नही थी रूम बंद करके रहने की, इसलिए मेरे रूम का दरवाज़ा खुला ही था और मई सुनीता को याद करते हुए सिर्फ़ चड्धि मे था. मेरा हाथ अपने लंड को सहला रहा था चढ़ि के उपारसे और तभी मुझे एक परछाई दिखी. सुनीता दरवाज़े पे खड़ी थी. वो मुझे खाने के लिए बुलाने आई थी पर उसने कुछ नही बोला और सिर्फ़ खड़ी रही. पता नही मुझे क्या सूझा. मई भी बस उसे इग्नोर करते हुए सहलाता रहा. कुछ सेकेंड्स के बाद उसने दरवाज़ा नॉक किया और मैने नाटक किया की, “आप कब आए?”
सुनीता शायद वही पाट गई थी. पर उसने तोड़ा गुस्से से मु मोड़ा और मुझे बोला, “खाने आ जाओ.” और बिना कुछ कहे चली गयी. मैने सच्ची मे खुद को कोसा और सोचा की, ‘काश मई एसा ना करता.’ कुछ झिझक के साथ नीचे गया खाने तो सुनीता सामने बेती थी और आकाश अभी तक नई आया था.
मैने कमरे की ऑक्वर्डनेस हटाने के लिए रेखा से आकाश के बारे मे पूछा और मुझे पता चला की आकाश 5 दिन के लिए सूरत गया हुआ था. ये जान के मुझे थोड़ी शांति हुई. फिर टीवी पर कोई मोविए चल रही थी और हमने थोड़ी यहा वाहा की बाते की. सुनीता मुझे इग्नोर कर रही थी पर रेखा मुझसे काफ़ी फ्रेंड्ली लग रही थी. उसने मुझसे नेक्स्ट दे कुछ सब्जिया लाने के लिए बोला और मुझे आकाश के बिके की चाभी भी दी.
मई निकालने ही वाला था की रेखा ने बोला वो भी चलेगी और यहा से शुरू हुई मेरी और रेखा की कहानी. मुझे बिके चलानी उतनी आचे से नही आती थी. रेखा ने एक सलवार कमीज़ डाली थी और वो मेरी गर्लफ्रेंड की तरह मुझे कमर से पकड़ के बेत गई. मुझे तो जैसे मज़ा ही आ गया. मई पूरा रास्ता उसके बूब्स को अपनी बॅक पे टच करवाता गया और वो भी कुछ खास रेज़िस्ट नही कर रही थी.
सब्जिया लेने के बाद रेखा ने मुझे एक फुल्के की लारी पे रुकने के लिए बोला. मई आज तक पानी पूरी बोलना भूल जाता हू. मुझे फुल्के कुछ इतने खास पसंद नई थे पर उसने मुझे एक फूलका ज़बरदस्ती अपने हाथ से खिलाया और तब तोड़ा सा पानी उसके कमीज़ पर गिर गया. उसे सॉफ करने के चक्कर मे मेरी कोहनी उसके बूब्स पे टच हो गई और उसने मज़े से आउच किया.
हम पूरे रास्ते गर्लफ्रेंड ओर बाय्फ्रेंड की तरह चिपक के रिटर्न जाते रहे. वो रास्ता बताने के बहाने मुझसे चिपकी रही और मई उसपे लाइन मरता रहा. घर आने से पहले उसने मेरे कान मे बोला गुजराती मे, “आज राते कैक स्पेशल करिसू (आज रात कुछ स्पेशल करेंगे).” मुझे उस टाइम पे तो कुछ समझ नई आया और मेरे पूछने का टाइम भी नई था क्यूकी हम घर पौहछ गये.
उस रात क्या हुआ और क्या था स्पेशल सर्प्राइज़, वो जानने के लिए अपना फीडबॅक ज़रूर दे देवेंड्रफोररोबोट्स@गमाल.कॉम पर. और अगले पार्ट का इंतज़ार करे.